इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़
यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा
जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया
काश उतना अच्छा दिल दिया होता
तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना होती
गुरुर
Comments
7 responses to “गुरुर”
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बहुत अच्छी कविता
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Thanks
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Nice
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Thanks
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वाह बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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Good
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