उस दिन मैंने तुमको,
पहली बार ही देखा था,
जब तुमने मेरे ऊपर,
गलती से गुलाब फेंका था,
न जाने क्यों उसके,
कांटे मुझे न चुभे,
लगा तुमने दिल का मरहम,
सरेआम फेंका था,
बोली मैंने इज़हार किया,
अब तुम्हारी बारी है,
गुलाब देकर मैंने कहा,
फिर ये जान तुम्हारी है….
– उमेश पंसारी
तुम और मैं….
Comments
4 responses to “तुम और मैं….”
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Nice one umesh ji
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Thank you ashmita ji 💐 😊
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वाह
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Good
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