ऐ मेरी किस्मत तू मुझे किस ओर ले जाएगी।
सुलझेगी जिंदगी या और उलझती जाएगी।
अभी इम्तहान और बाकी है शायद जिंदगी,
पता नहीं और कौन कौन से दौर दिखाएगी।
किस्मत
Comments
14 responses to “किस्मत”
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खत्म नही हुई अभी दास्तां मेरी
जिंदग़ी फिर से लौटकर आयेगी-

वाह
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क्या क्या काफ़िया मिलाया है
शुक्रिया
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वाह बहुत सुंदर रचना
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धन्यवाद
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लौटी हुई जिंदगी नए रंग लाएगी।
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वाह
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शुक्रिया
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Bahut khub
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Thanks
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सुन्दर कृति
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Thanks
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Nice
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Thanks
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