ऊड़ न सकूँ, पंख कतरा मैं परिंदा हूँ।
पर मरा नहीं अभी तक, मैं जिंदा हूँ।
आजादी तुझे ही नहीं हमें भी है पसंद,
तू ना सही, तेरे कृत्य पर मैं शर्मिन्दा हूँ।
परिंदा
Comments
12 responses to “परिंदा”
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वाह जी वाह
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धन्यवाद
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बहुत अच्छे भाई
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धन्यवाद
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Wah
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धन्यवाद
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Nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Sunder rachna
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Thanks
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