मुक्तक

अनजाने से संसार में खुशीयों को लो बटोर
अपने पराये में ब्यर्थ ना करो रिस्ते का डोर
समय बहुत मुल्यवान है करते रहो तुम प्रेम
सहज ही उत्पत्ति होगी भाई बंधू का प्रेम

महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

6 responses to “मुक्तक”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Nkce

  2. राम नरेशपुरवाला

    👍

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