प्रेम ने दिया है किसी को गम,
तो दी है किसी को खुशियां,
कोई तन्हाई में जलता है तो,
किसी को मिलता है सनम का साथ,
क्यों नहीं मिलता सभी को प्रेम की बरसात,
हुए राम सीता से अलग,
कहां कृष्ण भी रह सके राधा के साथ,
सबको पडा झेलना विरह की व्यथा का गम,
ईश्वर भी न बच सके इस तन्हाई की मार से |
Prem
Comments
4 responses to “Prem”
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Good
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Wah
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वाह
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Nice
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