Poonam singh, Author at Saavan's Posts

Ma baba

मां बाबा अनमोल है दोस्तों, गलती से भी इन्हें तुम न ठुकराना, किस्मत वाले को मिलता है इन दोनों का प्यार दोस्तों, इनकी इज्जत तुम करना, हीरे मोती फिर से तुम पा लोगे दोस्तों, मां बाबा दुबारा नहीं मिलेंगे, उनके गुस्से को गुस्सा तुम न समझना दोस्तों, वह तो आशीर्वाद का दूसरा रूप है, न जाने कितनी ख्वाहिशे उन्होंने दवाई है दोस्तों, उनकी सारी ख्वाहिशें तुम पूरा करना, उन्होंने जो कहा तुम्हारे अच्छे के लिए कहा ... »

Ek tu hi nahi

सब है यहां, एक तू ही नहीं, जाने क्या खता हुई मुझसे, और तुम चल दिए दूर मुझसे, याद तेरी दिल से जाती नहीं, तुझ बिन कहीं जी लगता नहीं, चाहता है दिल तुम होते तो, कभी किसी बात पर हंसते, कभी किसी बात पर मुस्कुराते, कभी किसी बात पर खफा होते, तेरा गुस्सा भी मुझे अच्छा लगता, तुम इतने खफा हो गए कि हमें भूल ही गए, अभी भी इंतजार है तेरा, आ जाओ तुम कहीं से, खिल जाएगी खुशियों की बगिया मेरी | »

Beti ki pukar

कहती है सरकार यहां, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, पर कहां सुरक्षित है बेटियां यहा, कभी था हमारा देश, सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा, अब तो इंसानियत न बची यहां, अब तो जमीर मर गई हैं यहां, रिश्तो का कत्लेआम हो रहा, बेटियां जाए तो जाए कहां, हर जगह है भेड़ियों की फौलाद यहां, बेटी घर से निकलना छोड़ दे? वह अपने अरमानों का गला घोट ले? अब है यह वक्त की पुकार यहां, पारित हो नया कानून यहां, उन भेड़ियों के लिए... »

Beti ki pukar

कहती है सरकार यहां, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, पर कहां सुरक्षित है बेटियां यहा, कभी था हमारा देश, सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा, अब तो इंसानियत न बची यहां, अब तो जमीर मर गई हैं यहां, रिश्तो का कत्लेआम हो रहा, बेटियां जाए तो जाए कहां, हर जगह है भेड़ियों की फौलाद यहां, बेटी घर से निकलना छोड़ दे, वह अपने अरमानों का गला घोट ले, अब है यह वक्त की पुकार यहां, पारित हो नया कानून यहां, उन भेड़ियों के लिए... »

Kalyug waris

वारिस था एकलौता उसका, नाजो से पाला था उसने, दी थी शिक्षा अच्छी उसकी, क्या क्या जतन किए थे उसने, लायक आदमी बनाने के लिए उसे, मालूम क्या था उसे, जाकर विदेश भूल जाएगा उसे, दिलासा तो दिया था उसने, ले जाऊंगा एक दिन मैं तुझे, इंतजार वो करती रही, पति तो पहले ही चल बसे, अब बारी थी उसकी, वह कहती रही उसे, मुझे वृद्दाआश्रम में रखो या खुद ले जाओ, दिलासा देता रहा बेटा, मां मैं आऊंगा एक दिन, वो इंतजार करती रही,... »

Wo thithuran ki rat

फिर आई वो ठिठुरन की रात, वो कुहासो भरा सवेरा, वो सिली सिली ठंड की रात, फिर आई वो याद गरम गरम चाय की चुस्की वाला सवेरा, तेरा मुझे चिढाना, और रूठना मेरा, फिर तेरा मुझे मनाना, वो मखमली धूप में बैठना, और बैठे रहना, फिर तेरी यादो के सपने बुनना, वो गेंदे का खिलना, और गुलाब की कलियों का झूमना, खिली खिली धूप में चंपा का झूमना, ठंडी रात मे रजाई में घुसना, फिर उससे न निकलने का मन होना, हरी हरी घास पर ओस की ... »

O syamre

ओ श्याम रे….. कहा छुपे हो मोरे श्यामरे, तुझे ढूंढे मोरे नैना, तेरे बिन मुझे ना एक पल चैना, छोड़ सखी तुझसे मिलने आई, करके लाख उनसे बहाने, तेरी बंसी की धुन सुनने को आई, तू कहां छुपे हो मोरे श्याम, तुझे ढूंढे मोरे नैना, मैंने तुझे वृंदा की गलियों में ढूंढा, जाकर यशोदा मैया से पूछा, कहां छुपे हो मोरे श्याम, तुझे ढूंढ मोरे नैना, मुझे पता है तुम कहां मिलोगे, यमुना तट है तेरा बसेरा, वही मिलोगे मोरे... »

Ummiden

दिल में उम्मीदों का दीपक जलाकर, कर रही हूं मैं तेरा इंतजार, घडी इंतजार की लंबी हो रही है, अब चले भी आओ मेरी जान जा रही है, ओ चांदनी न जाना तुम, जब तक आ जाए न मेरा सनम, फीकी है चंदा की चांदनी, तेरे बगैर ओ सनम, तू नहीं तो कुछ भी नहीं, तू ही मेरा दिलबर ओ सनम, तू नहीं तो कुछ भी नहीं, ये तारे नजारे हैं बेकार, लो अब आ ही गए तुम, खुशियों की बगिया खिल गई, उम्मीदों की कलियां खिल गई | »

Khara himalaya hame shikha raha

खड़ा हिमालय सिखा रहा, धीर और गंभीर बनो, नदियों की चंचलता सिखा रही, जीवन को नीरस मत करो, हरे भरे पेड़ यह सिखा रहे, पाकर कुछ देना सीखो, मिट्टी हमें यह कह रही, जीवन में स्थिरता लाओ, लालच के पीछे मत भागो, फूल हमें है कह रहे, हमेशा तुम खुश रहना सीखो, भंवरे हमें बता रहे, जीवन को संगीत समझो, खुशहाल जीवन का यही है सार | »

Khud ki khoj tu kar le bande

खुद की खोज तू करले बंदे, खुद में ही तू पाएगा उसे, उस उस ईश्वर को याद तू कर ले बंदे, खुद में ही तू पाएगा उसे, कुछ ध्यान साधना कर ले बंदे, उस ईश्वर को मन में बसा ले बंदे, बुलबुले हैं हम सब उसी समंदर के बंदे, मिटना बनना है उसी समंदर में बंदे, क्या तेरा क्या मेरा है, सब उसी की कृपा है रे बंदे, मंदिर में ढूंढा मस्जिद में ढूंढा उस ईश्वर को मैंने कहां कहां ढूंढा, वह तो मुझ में ही था जो समझ न पाया, खुद की... »

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