श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।
इधर से गोपियाँ निकली
उधर से गोपियाँ निकली
श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।।
पीलाती दूध बच्चे को कलेबा कर रही कोई।
लगी परिजन की सेवा में मीठी नींद में सोई।।
सुनकर वंशी की धुन को घर से गोपियाँ निकली।।
श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।।
श्याम की मुरली
Comments
8 responses to “श्याम की मुरली”
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वाह बहुत सुंदर रचना
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आभार
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सुन्दर रचना
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Wah
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धन्यवाद
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wah
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शुक्रिया
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सचमुच
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