सावन

सावन कि बारिश का
खूब फायदा उठाया मैंने
बहा दिए पानी मे वो लम्हे
जो थे मेरी यादों में
और कश्ती बना कर
तिरा दिए तेरे खत
जो कभी छुपा कर रखे थे
मैंने किताबों में.

Comments

9 responses to “सावन”

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

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