nitu kandera, Author at Saavan's Posts

बच्चा

एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही. जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही. ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही. ख्वाब उसके टूट चुके थे रिवायत ये बचपन से ही चलती रही. वह तो कई साल पहले ही मर गया था पर लाश पचपन तक चलती रही. »

डरना मना है

डरना मना है उनका जो मैदान जीतने चल पड़े डटकर खड़े तूफानों में ना माथे पर कभी बल पड़े. दिए की लौ को क्या खौफ मौत के झरोखों का जो खुद ही जलकर जी रहा उसको क्या डर हवा के झोंकों का. बनाते बेखोफ घोंसले ऊँची डाल पर उन्हें सांप की परछाइयों से डर नहीं लगता उड़ते फिरते बदलो के पार उन्हें आसमान की ऊंचाइयों से डर नहीं लगता. पूरे वेग से बहती नदी भी बहकर सागर में मिल जाती सख्त धूप में तप कर कच्ची मिट्टी भी पत्थ... »

वक्त्त

सावधान करती हूं कवियों को ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग हवा झूठ की चल पड़ी है सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग. कितना समझा लोगे तुम उनको जमाना बहुत ही संगदिल है जिस तरह गीले कागज पर शब्दों का लिख पाना मुश्किल है. सच्चा साथ निभा कर दुआएं बहुत सी ले आना धन दौलत कमा कर क्या करोगे मुश्किल है इसको ऊपर ले जाना. झूठ का चाहे कितना भी चढ़े फितूर सच की राह पर चलना हुजूर वक्त तो रेत की तरह फिसलता रहता है एक दिन व... »

कवि का हाल

कैसे बताएं दर्द का आलम क्या होता है लिखने के लिए कवी खुद को कितना नोचता है रचना शुरू होती है कलम की नोक से और अंत पूर्ण विराम (!)पर होता है. घिस घिस कर जब कलम को हम हाल-ए-दिल अपना लिखने लगते हैं दर्द मुझे होता है और जाने क्यों? आँसू दूसरों की आंखों से बहने लगते हैं. हौसला टूटने की बात कहूं तो लोग सूखी टहनियों की तरह टूट कर बिखरने लगते हैं टूटते हैं हम आईने की तरह और लोग टूटे टुकड़ों को समेटने लगते... »

बागी

अपनी ही आजादी के आदी बन गए जाने हम क्यों बागी बन गए बेबसी की रस्सी पर लटक कर कई ख्वाब मेरे खुदकुशी कर गए. धकेलो कितनी भी जोर से मुझे संभलना सीख गई हूं मैं मुझे जलाना मुश्किल होगा कागज की तरह भीग गई हूं मैं. ऐ खुदगर्ज जमाने जो तुम मेरा दिल ना दुखाते तो मेरे शब्द यूं शोले ना बरसाते उडूं मै आसमान में या तेरुं बहती नदी में मिले हो तुम हमेशा मेरी राह में जाल बिछाते. कलम की नोक को सूई की तरह चुभाया दुश्... »

बर्बाद हो गए

वह भी मुझे चाहती है यह सोच हम बेबाक हो गए प्यार में गिरते ही दुनिया की नजरों में नापाक हो गए मुस्कुरा कर उसने हमें देखा हमें लगा हम प्यार में आबाद हो गए दुनिया ने कहा जी नहीं हुजूर आज से तुम प्यार मे बर्बाद हो गए. »

मुहब्बत

मेरी मासूम मोहब्बत को प्यार का तोहफा दे गए बदले मे बेचेनियाँ बेकरारियाँ दी और जन भी साथ ले गए »

भूल

याद तुम्हे मै अब नहीं ऑंखें इंतजार की करती है भूल अब तो अश्कों पर भी मेरा बस नहीं आँसू गिरकर बन गए सूखी मिटटी मे धूल. »

कामयाबी

ठोकर लगने पर भी आगे मैं बढ़ता जाऊंगा कैसा भी हो कामयाबी का रास्ता हर तरीके को अपनाउँगा जरूरत पड़ी तो खुद को मैं जलाऊंगा छू लूंगा आसमान धुआं मैं बन जाऊंगा »

पहचान

अगर मैं होती गरीब किसान की उपजाऊ भूमि बंजर होने पर जरूर दुत्कार दी जाती मैं होती कुमार के चाक मिट्टी उसी के दिए आकार में ढल जाती मैं होती माली के बाग का फूल मुरझाने के लिए गुलदस्ते में छोड़ दी जाती मैं होती किसी महल की राजकुमारी विवाह के बाद छोड़ उसे मै आती कहने को तो होती मै लक्ष्मी घर की पर अलमारी के लॉकर की चाबी बनकर रह जाती चाहे चिल्लाऊं मै खूब जोर से फिर भी मन की व्यथा ना कह पाती चाहे मैं होत... »

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