पहले पढ़ता था फर्क
तूफान आते जाते थे
जबसे गहराइयों से नाता जोड़ा है
तेरे ध्यान में मग्न हो
भीड़ में भी संसार से नाता तोड़ा है।
निमिषा सिंघल
नहीं पड़ता फर्क अब मुझको
Comments
8 responses to “नहीं पड़ता फर्क अब मुझको”
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Nice
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🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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Nice
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💐
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Good
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🙏🙏🌺🌺
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अति सुंदर
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वाह
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