पंखों की उड़ान

सच बोलने वालों की जहां में कदर नहीं होती
इमानदारों के पास मखमल की चादर नहीं होती।
सो जाते हैं वह तो धूप की चादर बिछाकर
उनके सपनों में पंखों की उड़ान नहीं होती।

Comments

4 responses to “पंखों की उड़ान”

  1. Pratima chaudhary

    बहुत ही उम्दा

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