सौंप रही है देखो पृथ्वी अपना संरक्षण किन के हाथों में जिनको आता नहीं सहेजना प्राकृतिक संसाधनों को जो ना कर सकते हैं अपनी सुरक्षा वह पृथ्वी की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे ! यही सोचकर […]
सौंप रही है देखो पृथ्वी अपना संरक्षण किन के हाथों में जिनको आता नहीं सहेजना प्राकृतिक संसाधनों को जो ना कर सकते हैं अपनी सुरक्षा वह पृथ्वी की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे ! यही सोचकर […]
सख्ती से नहीं नरमी से पेश आएंगे किसी के प्यार में हम यह भी कर जाएंगे। यूं तो बुरे नहीं हैं हम साहब पर किसी के मार्गदर्शन में हम और सुधर जाएंगे।
मैं शिक्षक हूँ संसार में ज्ञान फैलाता हूँ अपनी कलम की धार को अपने साहित्य की तलवार बनाता हूँ। तुम जी लो तुम्हारे लिए यह नया मन्ज़र है मैं तो हर मन्ज़र के उस पार […]
तुम्हारी छोटी सोंच मुझे हैरान करती है सदियों से मेरा अंदाज़ निराला है। बस तुम जैसों के ही पेट में दर्द होती है। चंद सिक्कों और ताज़ की जरूरत नहीं मुझको शोहरत तो अभिषेक के […]
मैं सिर्फ अपने हुनर की पैमाइश करता हूँ नुमाइश नहीं करता। सभी के साथ मोहब्बत से पेश आता हूँ पक्षपात नहीं करता।
अजब-गजब से लोग हैं! ना जाने क्यों इंसानियत से इतना जलते लोग हैं कुछ होश में हैं तो कुछ बेहोश हैं। मगर कुछ मगरूर होकर अपनी ही धुन में बेहोश हैं।
तेरी चालबाजी सब जानता हूँ मैं न जाने फिर भी क्यों इतना तुझे मानता हूँ मैं। —————————————- दिल बहुत बार दुखाया तूने पर तुझे देख कर यही एहसास होता है कि सदियों से तुझे जानता […]
दूरियां कितनी भी हों मिटाता चला जाऊंगा तेरे दिल में कितनी भी कड़वाहट हो मैं अपने व्यवहार से तेरे दिल में जगह बनाऊंगा तू कितनी भी कोशिश कर ले तुझे भी हो जाएगा मेरी वफाओं […]
प्यार जताने की बात वह करते हैं जो अक्सर दिल जलाया करते हैं। होठों पर रखते हैं गुलाब और हाथों में जहर का प्याला लिए रहते हैं।
सिसकते जज्बात हँसने लगे तुम्हें देखकर न जाने ऐसा क्या था तुममें! जो मेरी बिखरी जिंदगी को तुमने दो पल में ही समेट लिया। और ऐसा समेटा कि मैं कभी फिर बिखर ना सका। टूटा […]
बैरन हुई है दुनिया जब से तुम से नजर मिली तेरे प्रेम जाल में फंस कर ही यह आत्मा स्वतंत्र हुई।
बारिश की बूँदों से डरना कैसा। बिन पतछड़ का चमन कैसा।
दोस्तो ! मेहनत मे दिन- रात देखा नही जाता। मंजिल हो करीब तो मैदान छोड़ा नही जाता।।
आये है आप तो स्वागत हम करेंगे। मेहमान नवाज़ी का फ़र्ज अदा करेंगे।।
चलो फिर से एक- दूजे से बिछड़कर देखते है, प्रेम मे वियोग की पराकाष्ठा को हम देखते है।
रियासत है मेरी यह याद रखना, तहजीब का चलन बरकार रखना।
जो अपनी खुद की पहचान छिपाये बैठे है। वो नासमझ मेरे वजूद पर शर्त लगाये बैठे है।।
सबने अपने किरदार पर पर्दे डाल रखे है। फैसला मेरा करेगे यह वहम भी पाल रखे है।
तुझे मैं भूल नहीं सकता तू मेरा पहला प्यार है तू ही मेरा इकरार है तू ही मेरा इज़हार है मैं तुझे भूल नहीं सकता तू मेरा पहला प्यार है तू मेरी मंजिल है तू […]
मेरी ख्वाहिशें समुंदर जैसी गहरी हैं, और तेरा प्यार आँखों के आँसू जितना छिछला।
मैं लिखता हूँ रात भर कविता तू सुबह पढ़ कर खुश होती है। मैं जब कभी हँसता हूँ खुशियों में मुझे तू हँसता देख कर रोती है।
ख्वाइशें पूरी करूंगा मैं तेरी आखिरी दम तक साथ निभाऊंगा तेरा धरती से फलक तक
बेफिक्र बचपन और जिन्दगी है न्यारी, थोड़ी शरारत और साँवली सूरत है प्यारी। मम्मी की गुड़िया और पापा की दुलारी, रहती उनके दिल में बनकर राजकुमारी। ख्वाहिशें हुई हैं पूरी चाहे जितनी हो गरीबी, भूल […]
प्यारे बच्चों, प्यारे बच्चों आओ मेरे पास, दूर वहाँ क्यों बैठो हो तुम हो क्यों इतने उदास? आओ मिलकर पाठ पढ़ें कुछ सीखें नयी बात, मिल जुलकर हम साथ रहें और मन में हो विश्वास। […]
सूरज की किरणें भी सुबह-सुबह कयामत ढा रही हैं, पूछ रही हैं, कैसे हैं वो? जिनकी तुम्हें याद आ रही है।
बुरा उन्हें कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी……. शायद मैं ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यों होगी..?
जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम, जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम। दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से, पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।
गरीब की कब्र पर कहाँ कब दीप जलते हैं , रेगिस्तान में आसानी से कहाँ फूल खिलते हैं। चाँद-तारों की ख्वाहिश तो महल वाले रखते हैं हम जुगनू हैं अपनी फिजाओं के….हम तो खुद से […]
आरज़ू नहीं रखता कि पूरी कायनात में मशहूर हो शक्सियत मेरी। जनाब! आप जितना जानते हो सच में उतनी ही है पहचान मेरी।।
मोमबत्ती जलाने से अब कुछ न होगा, कोर्ट के चक्कर लगाने से कुछ न होगा। बलात्कारियों को एक बार जिन्दा जलाकर तो देखो….. फिर किसी ‘निर्भया’ और ‘आसिफा’ का बलात्कार नहीं होगा।।
संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल में , निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी। देखेंगे जब सब तुम्हारे होंठो पर हल्की-सी हँसी, महफ़िल में हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।
उम्मीदों का दीया जलाकर इस आशा में बैठे हैं कल सूरज खुशियाँ लाएगा चाँद सजाकर बैठे हैं
तेरी सारी सच्चाई जानता हूँ मैं पर तेरी खुशी की खातिर मुझे अनजान बनना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूँ तू अपने मुंह से अपनी सच्चाई बता! तुझे बेवफा बुलाना ना मुझे खराब लगता है।
सच बोलने वालों की जहां में कदर नहीं होती इमानदारों के पास मखमल की चादर नहीं होती। सो जाते हैं वह तो धूप की चादर बिछाकर उनके सपनों में पंखों की उड़ान नहीं होती।
तुझसे लंबी जुदाई सही ना जाएगी तेरे जाने से मेरी आँख भी भर आएगी हो ना जाना कहीं दूर मुझसे तू तेरे बिन यह दीवानी मर ही जाएगी।
शाम से ढूंढती थी मैं तुझको तू न जाने कहाँ खो गया मैं तुझे प्रेम की धरती समझती थी तू नफ़रत का आसमान हो गया।
तुम्हारी ख्वाहिशों को पूरा करने आऊंगा जरूर ना उतरा है ना उतरेगा तुम्हारी आँखों का सुरूर
संकल्प लें कि समाज में शिक्षा का संदेश फैलाएंगे, बेटा हो या बेटी सभी को एक साथ पढ़ाएंगे।
आज 14 जुलाई है, फरवरी नहीं जो तेरे लिए शायरी लिखूँगा मैं डूब चुका हूँ पहले भी किसी आँखों में अब बार-बार थोड़े ही डूबूंगा।
झुकी हुई नज़रें उतनी ही हसीन लगती हैं, जितना खुली हुई शराब की बोतल।
दौलत चाहे जितनी कमा लो पर शोहरत कमाने में जमाने लग जाते हैं।
सुविचार:- कभी-कभी अपनी बात पर अटल रहने से झुक जाना ही अच्छा होता है। जैसे जब आँधी आती है तो बड़े पेड़ गिर जाते हैं। क्योंकि वह अपनी अकड़ में होते हैं परंतु छोटी-छोटी झाड़ियां […]
किसी की अहमियत हमें तभी होती है जब वह हमें छोड़ कर चला जाता है। ——————————————– और किसी की चाहत हमें तभी होती है जब वह हमारे मुकद्दर में नहीं होता है।
नारी का सम्मान करो हर पल आने ना दो उसकी आँखों में आँसू, ना धन चाहे ना दौलत चाहे वह तो है प्रेम-पिपासु।
तुम्हारे सपनों में कोई आता है क्या? तुम्हारे ख्वाब कोई सजाता है क्या? जिस तरह मैं तुम्हारे आगे बिना गलती घुटने टेक देता हूँ उस तरह तुम्हें कोई प्यार जताता है क्या?
यह विपक्ष की कैसी राजनीति? अपने आप ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं। अपने नेताओं की फोटो खुद ही फाड़ते हैं और जब उनके नेता दूसरी पार्टी में जाते हैं तो ताने सरकार को […]
सीमा पर यह बम बारूदें बंद करो लड़ना है तो सामने आकर जंग करो हम भारतवासी हैं तुम को धूल चटा देंगे तुमको तुम्हारी सीमा पर आकर मिट्टी में मिला देंगे
अत्याचार खत्म करने का एक ही है उपाय घर-घर में शिक्षा का करें प्रचार-प्रसार। शिक्षा ही वह दीपक है जो हर घर में उजाला करती है शिक्षा ही है जो जानवर को इंसान बना देती […]
रक्तरंजित इश्क में हज़ार होते हैं ख्वाब मगर पूरे नहीं होते।
ख्वाब सो जाते हैं छत पर जब तू उदास होता है। जब तू मुस्कुराता है तो सुकून पास होता है। काव्य सौंदर्य:-मानवीकरण
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