वाह, झमाझम बारिश देखो
सुन्दर सावन बरस रहा,
तन भीगा मन भीगा मेरा
तेरा मन क्यों तरस रहा,
आ जा पास प्रियतम मेरे,
एक नई शुरूआत करें,
आज मिटा लें अपनी दूरी
एक नई शुरूआत करें।
— डॉ0 सतीश पाण्डेय
एक नई शुरूआत करें
Comments
4 responses to “एक नई शुरूआत करें”
-
वाह से पद की शुरुआत और झमाझम शब्द से बारिश को विशिष्ट बनाना और प्रकृति की सुन्दरता में श्रृंगार रस भरना।
कमाल का हुनर है।।
बहुत खूब -
सादर धन्यवाद सर, आलोचक हो तो ऐसा हो, को कवि में उमंग पैदा करे, ग्लानि नहीं। आपकी लेखनी को सलाम
-

बहुत खूब
-
सादर धन्यवाद जी
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.