इश्क का मारा (शायरी)

कोई गरीबी का मारा ,
कोई बदनसीबी का मारा ,
कोई वक्त से परेशान हैं ,
कोई अपनों का मारा ।
मगर वो बेपरवाह सा,
मगन अपने दर्द में,
जो है इश्क का मारा।

Comments

8 responses to “इश्क का मारा (शायरी)”

  1. Geeta kumari

    वाह ,क्या बात है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत आभार मैडमजी 🙏

      1. Geeta kumari

        Welcome

  2. बहुत ही सुंदर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत आभार 🙏 सर

  3. Pratima chaudhary

    बहुत ही उम्दा

Leave a Reply

New Report

Close