दो सिक्के

ले दे के दो सिक्के ले कर चली थी बाजार में
इक उछालने में खो गया, एक को रख भूली कहीं पर

Comments

16 responses to “दो सिक्के”

  1. Geeta kumari

    वाह, क्या बात है

    1. Vasundra singh Avatar
      Vasundra singh

      धन्यवाद

  2. Suman Kumari

    बहुत ही अच्छी

    1. Vasundra singh Avatar
      Vasundra singh

      धन्यवाद

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    ,,vasundra जी कृपया भाव के बारे में थोड़ा सा हिंट्स दे।

    1. Vasundra singh Avatar
      Vasundra singh

      आप विनय जी का अर्थ स्पष्टीकरण देख लें

      1. मोहन सिंह मानुष Avatar
        मोहन सिंह मानुष

        बहुत ही बेहतरीन 🙏

  4. Satish Pandey

    Nice

    1. Vasundra singh Avatar
      Vasundra singh

      धन्यवाद

    1. Vasundra singh Avatar
      Vasundra singh

      धन्यवाद

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    परमात्मा ने हमें दो सिक्के पूँजी के रूप में दी है। पहला यौ़वन और दूसरा आत्मज्ञान। एक को तो प्रदर्शन करते हुए गवा देते हैं और दूसरे को भुलाए हुए हीं जीवन बिता देते हैं।।
    क्या मैं ठीक हूँ ,वसुंधरा जी?
    बहुत खूब। जीवन दर्शन।।

    1. Vasundra singh Avatar
      Vasundra singh

      बहुत सटीक अर्थ स्पष्ट किया है आपनेl धन्यवाद

    2. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत सही, शास्त्री जी

  6. Pratima chaudhary

    बेहतरीन

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