मैं किसान हूं समझता हूं मैं अन्न की कीमत क्योंकि वो मैं ही हूं जो सींचता हूं फसल को अपने खून और पसीने से मरता हूं हर रोज अपने खेत की फ़सल को जिंदा रखने […]

ले देकर कुछ यादें हैं मेरे पास जो दिल की तिजोरी में संभाल के रखीं हैं गरीबी जब आयी करीब मेरे तो लोगों ने हिदायत दी कि कर लूं सौदा कुछ यादों का चंद पैसों […]

आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बने समाज जब संवेदनहीन हो जाये तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बने तिरंगे के […]