एक दिन, ऐसे ही मैंने कोशिश की ,
खुद को खुद में ढूंढने की,
अपने वजूद को ;
गहराइयों में टटोलने की,
अरे! कौन हूं मैं?
लिंग ,नाम, पहचान ,
गौत्र, जाति ,धर्म,देश,
सब पर विचार किया,
फिर भी संतुष्टि नहीं मिली।
फिर अचानक, मन से आवाज आई ,
इन्सान हो और कुछ भी नहीं।
एक दिन
Comments
8 responses to “एक दिन”
-
Very nice
-

बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
-
-

nice poetry
-

बहुत बहुत आभार 🙏
-
-
बहुत खूब
-

सादर धन्यवाद 🙏 सर
-
सुन्दर एवम् सत्य
-

बहुत सुंदर
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.