13 Comments

  1. बहुत ही सुन्दर काव्य रचना।
    “क्या पता थी कश्मकश नभ – धरा के बीच में”
    समीक्षा के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं सर….
    अद्भुत लेखन। सैल्यूट…

Leave a Reply