बिन बरसात के ही….

इश्क़ क्या करे हम, वो कहते है इसके पास दिल ही नहीं है।
उन्हें क्या पता कभी कभी बिन बरसात के ही हम भीग जाते है।।

Comments

3 responses to “बिन बरसात के ही….”

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. बहुत ख़ूब

Leave a Reply

New Report

Close