Praduman Amit's Posts

दो गज़ ज़मीन

मै उनके गली में दो गज़ ज़मीन मांगी एक आशियाना बनाने को उसने इतनी बड़ी शर्त रखी कि , मैं दंग रह गया सोचने लगा मेरी इतनी औकात कहाँ जो उनकी ख्वाईश को हम पुरा कर सके मै वापस वहीं चला गया जहाँ आशिक़ गम की समंदर में डुबकी पे डुबकी आज भी लगा रहे है। »

(हास्य कथा ) भागमभाग

बनवारी नया नया थानेदार बना था। गाँव में हमेशा छाती तान कर चला करता था। गाँव के लोग उन्हें काफी मान सम्मान दिया करते थे। बनवारी के चौबीस की छाती छत्तीस की तब होती थी जब कोई रास्ते में उसे टकरा जाता था। बेचारा वह राही डर के मारे रास्ते के एक तरफ हट जाया करता था। एक दिन शाम के समय बनवारी पुलिस की वर्दी पहन कर गाँव में धाक जमाने चल पड़े। गाँव के पगडंडी पकड़े जा रहे थे। अचानक उनको रास्ते में एक भैंसा म... »

यादों की बारात

मुझे ठुकरा कर काश तुम अपना जीवन संवार लेते। तेरी बेवफ़ाई को ही हम अनमोल तोहफ़ा समझ लेते।। मुझे यह दु:ख नहीं कि तुम मेरे हमसफ़र नहीं बन पाए। दु:ख तो इस बात की है हम एक हो के भी एक हो न पाए।। जीवन में हर शख्स को मुकम्मल प्यार नहीं मिलता।। फिर भी यादों की बारात में यादों के फूल है खिलता।। »

पहली प्यार की पहली निशानी

पहली प्यार की पहली निशानी । संभाल कर रखना ऐ मेरी रानी।। यदि कल हम मिले या न मिले। फिर भी गुलशन में गुल खिले।। मिलन पे मौसम भी बेमिसाल है। क्योंकि मुझे तुम से ही प्यार है।। जुदा कर दे खुदा में दम नहीं । मुहब्बत है कोई खिलवाड़ नहीं ।। दिल दिया है तो जान हम देंगे । सितमगर को हम परख भी लेंगे।। »

बीस हज़ार का बेटा

अचानक दस साल के एक फुटपाथी बच्चे के कानों में किसी औरत की चीख सुनाई पड़ी। वह अपनी झोंपड़ी के बाहर आया तो देखा एक औरत खून से लथपथ बीच सड़क पर तड़प रही थी। वह झट से थाने के तरफ दौड़ पड़ा। वह दारोग़ा के सामने जा कर सब कुछ बता दिया। दारोगा तुरंत उस बच्चे को जीप पर बैठाया। वहाँ से चल पड़ा। घटना स्थल पर जैसे ही पहुँचा वैसे ही तुरंत एम्बुलेंस को फोन किया। गाडी पहुँची उसे उठाया और अस्पताल ले गया। सही समय ... »

माँ की ममता

मूसलाधार बारिश हो रही थी। रात का समय था। एक गरीब माँ अपने एक साल के बच्चे के संग एक पेड़ के नीचे बैठी हुई थी। हर बार पत्तों से टपकता पानी उस माँ को भिगो रही थी। मगर वह माँ अपने बच्चे को छाती से लगाए बारिश के पानी से उसे बचाने का काफी प्रयास कर रही थी । उसे डर है कि मेरा लाल अगर भीग गया तो बीमार पर जाएगा । जब जब बच्चे के उपर पानी टपकता था तब तब वह औरत अपनी आंचल से उसे पोंछ दिया करती थी। आहिस्ता आहि... »

आंधी

मेंने आशियाना बनाना छोड़ दिया। जब से, आंधी के मौसम आ गया।। »

मालिक सभी को सुनते है

एक बार अकबर बादशाह को प्यास लगी। वह अपनी प्यास बुझाने के लिए एक फकीर के झोंपड़ी के निकट गया। जब उसने आवाज लगाई तो एक बारह साल की बच्ची बाहर निकल कर फिर वापस अपनी झोंपड़ी में चली गई। कुछ देर बाद फकीर बाहर निकला।अकबर – मुझे प्यास लगी है। क्या पानी मिलेगा? फकीर हां हां कहते हुए बाल्टी के सहारे कुएँ से पानी ले कर अकबर के सामने खड़ा हो गया। अकबर ने पानी पीया। अकबर – तुम्हारे घर में वह नन्ही... »

अधूरा प्रेम

अनीता नाम था उसका। देखने में सुंदर नहीं थी। फिर भी चंचलता व मीठे बोल से ही कब अमित उसका दीवाना बन गया उसे पता ही नहीं चला। उपर वाले ने गोरा रंग चुरा कर शाम रंग से उसे तराशा था। उसी शाम रंग का दीवाना था अमित। जब जब दोनो मिलते थे तब तब एक दूसरे के करीब आने का प्रयास करते थे। मगर उन दोनों मे इजहार नहीं हो पाता था। समय यों ही गुज़रता गया। धीरे धीरे अनीता किसी और की हो गयी ।अमित को तब पता चला जब एक दिन... »

(लेख) नारी

आज नारी के पास क्या नहीं है। फिर भी पुरुष उसे अपनों से कमजोर ही समझ रहे है।जबकि,आज हमारी सरकार नारी के प्रति तरह तरह के शिक्षा दे कर पुरुष के मुकाबले में खड़ा करने का प्रयास कर रही है। यहाँ तक कि नारी प्रधान कई फिल्में भी बनी। अनेक साहित्यकार कलमें भी चलायी। सरकार नारी को नौकरी में आरक्षण भी दिया। नारी बखूबी मेहनत करके आई पी एस, जिला कलेक्टर, प्रोफेसर, पायलट व डाक्टर भी बन कर ज़माने को दिखा दी। फि... »

बेटी पढाओ अपनी शान बढाओ

कोमल हमेशा अपने माता पिता से डाट फटकार सुना करती थी। जबकि कोमल आठवीं कक्षा के छात्रा थी। पढ़ने लिखने में अपनी क्लास में अव्वल थी। सभी शिक्षक उसे मानते थे।प्रतियोगिता में बराबर बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी लेती थी। बेशक वो समान्य ज्ञान हो या किसी विषय पर भाषण देना हो तो सबसे पहले कोमल का ही नाम आता था। इतनी गुणवान होते हुए भी माता पिता उसे हमेशा उच्च नजर से कभी देखा ही नहीं। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि, ह... »

आठवां अजूबा

गुवाहाटी शहर कर्फ्यू से ग्रस्त था। जहां तहां शोर मची थी। रास्ते पे इन्सान तो क्या जानवर तक चलने में कतराते थे। सारा शहर भयाक्रांत की आगोश में समाया हुआ था। इतने में किसी औरत की आवाज़ मेरी कानो में टकराई- मेरे बच्चे को बचा लो। बुखार से तप रहा है। अरे कोई तो जाओ किसी डाक्टर को बुला लाओ। उस औरत की आवाज़ में करुणा थी। मेरा दिल पसीज़ गया। मै जैसे ही घर का दरवाजा खोलना चाहा वैसे ही मेरी पत्नी रोक कर कहन... »

बेटी प्रज्ञा

रोहन काका फोर्थ ग्रेड की नौकरी करके अपने दो बेटे प्रदीप ,प्रताप एवं बेटी प्रज्ञा को पढ़ाया लिखाया। प्रज्ञा को ग्रैजुएट करने के बाद ही हाथ पीले कर दिए। प्रदीप व प्रताप को यू पी सी की तैयारी भी करवाए। जल्द ही उन दोनों को अच्छी नौकरी भी मिल गई और रोहन काका को रीटायरमेंट।माँ गायत्री हमेशा चूल्हा चौका में ही व्यस्त रहती थी। रोहन काका दोनों बेटों की शादी भी धूमधाम से कर दिया। ज़माने के अनुसार दोनों बहूओ... »

कैसे होते है ऐसे माँ बाप

मैं उस वक्त हैदराबाद में होटल मैनेजमेंट कर रहा था। एक गरीब माता पिता दो साल की बच्ची को ले कर आया और मुझ से कहा – इस बच्ची के दूध के लिए मेरे पास पैसे नहीं है। दस रुपये है तो दे दीजिए। मुझे दया आ गयी। क्योंकि वह बच्ची मुझे बहुत ही गौर से देख रही थी। देखने में भी सुंदर व मासूम लग रही थी। मै उसे पाँच सौ रुपये देते हुए कहा – बच्ची को दूध पिलाना और आप लोग भी कुछ खा लेना। दो घंटे बाद मै अपन... »

मंजिल की खोज एक माँ को

एक बूढ़ी औरत, कमर झुकी हुई, एक हाथ में लाठी, दूसरे हाथ में एक छोटी सी गठरी लिए गाँव के पगडंडी पकड़ कर जा रही थी। सिन्हे में गम, आँखों में आंसू को अपना हम सफर मान कर बढ़ती जा रही थी। गाँव से काफी दूर निकलने के बाद रास्ते में एक नयी नवेली दुल्हन को देखी। वह पहली बार ससुराल बसने के लिए जा रही थी। उसे गौर से बूढ़ी औरत देखने लगी। उसे देख कर अपनी बीती कहानी याद आने लगी। जब वह भी किसी की दुल्हन बन कर अपन... »

क़हर

एक तरफ कर्ज तो दूसरी तरफ महामारी करोना। कैसे जिये हम यही कहता है आज सारा ज़माना।। कमाते है हम तब ही दो वक्त की रोटी मिलती है। न काम है न पैसा है अगर है तो करोना का डर है।। स्कूल कालेज सब बंद हुए शिक्षक विद्यार्थी मारे गये। अनेक बच्चों के भविष्य बन कर भी आज बिगड़ गए।। »

करोना और गरीबी

चारो तरफ , करोना का क़हर था। सभी लोग भयाक्रांत की आगोश में समाया हुआ था। किसी को किसी से वास्ता नहीं था। लोग एक दूसरे के नजदीक जाने में भी कतराते थे। उसी समय एक दस वर्ष की गीता रोज की तरह रास्ते के फुटपाथ पर एक मैली चादर बिछा कर भीख मांगने बैठ गई। लोग आते जाते रहे मगर उस मासूम से दो गज़ की दूरी बना कर चले जाते थे। सुबह से शाम हो गई लेकिन, किसी ने उसे एक रुपये तक नहीं दिया। वह मायूस हो कर रास्ते के... »

गंगा काशी

माँ बाप को दु:ख न देना उसने ही तुम्हें चलना सिखाया जिस पैर पर चल कर तुमने कामयाबी हासिल की उसी पैर पर उसने कभी अपनी जान न्योछावर किया । हंसना सिखाया बोलना सिखाया आज तुम हो गए इतने बड़े कि डांट कर बोलती बंद कर देते हो उसे अपनो से कमजोर समझ के। तीर्थ कर के तीर्थराज बनते हो अरे नादान सारे तीर्थस्थान तो तेरे घर में विराजमान है अपनी काली पट्टी तो खोल देख गंगा काशी तेरे घर में है। »

वफा के बदले

खट्टी मीठी यादों से आज उस बेवफा की तस्वीर बनाई। दिल में आ कर देखिए दूर हो गया आज सनम हरजाई।। अक्सर मैं सुना करता था प्यार में रब बसता है। गर रब बसता है तो मैने मुहब्बत में धोखा क्यों खाई।। »

दीदार

अब चलें काफी रात हो गई । आपसे मेरी दो बातें हो गई।। वक्त और ठंड के तकाजा है। चलो आप से दीदार तो हो गई।। »

गरीब की दीवाली

गरीब के घर में झांकीए कैसे मनाते है निर्धन दीवाली। मन में उमंगों की पटाखे फोर कर निर्धन ऐसे मनाते है दीवाली ।। दीया है बाती है मगर तेल नहीं लाला भी आज उधार देगा नहीं। मन में ख्वाईशें तो थी अनेक चलो यह वर्ष न सही अगले वर्ष ही सही।। मुनिया की मम्मी मुनिया के पुरानी कपड़े धो देना क्योंकि,। आ गयी है इस वर्ष की दीवाली।। »

एक ही दीया

हम सब दीप तो जलायेंगे, बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए। मगर हम वो दीप कब जलायेंगे मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।। हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ घर आंगन में जलाते है अनेक दीया। छल कपट के छाती पर कब हम जलायेंगे स्वच्छता के “एक ही दीया” ??।। »

वाह !! कहीं कहीं…..

कहीं दीप जले तो कहीं , गरीब के घर में चूल्हा न जले। हम खुशियाँ मनाते रहे और वो, अंधेरे में माचिस खोजते रहे।। कहीं दीपावली की धूम तो कहीं पापी पेट में भूख की शहनाई। गगन में देखो रंग बिरंगी पटाखे वाह रे दुनिया क्या मस्ती है छाई ।। »

गरीब के लाल

नये कपड़े, नयी उमंग, पटाखे और डिब्बे की मिठाई । गरीबी में पल रहे लाल के किस्मत में कहाँ है भाई ।। दीप जला कर खेल कूद कर। अपनी शौक को खुद में ही, कभी सिमटते हुए देखा है भाई?।। »

क्या से क्या हो गया

हम दीवाली क्या मनाए दीवाली तो करोना ले गए। थी जुस्तजू मुझे भी मगर साल २०२० हमें बर्बाद कर गए।। हमे क्या पता था देश में कभी ऐसे भी दिन आयेंगे। बुरे वक्त पे रिश्ते नाते भी अपनो के साय से दूर भागेंगे।। »

दु:ख

कभी कभी दु:ख को गले लगा कर भी जीना पड़ता है। तभी तो सुख से ज्यादा इस जहाँ में दुःख की महता है।। जब तक इंसान के जीवन के धड़कन की डोर चलती है। तब तक ए अमित रंग बिरंगी दु:ख हमारे साथ कहाँ छोड़ती है।। »

पुरानी दास्तां

एक दिल कहता है, फिर एक मर्तबा किसी से इश्क़ कर। दूसरा दिल कहता है, ए नादान पुरानी दास्तां से तो डर।। »

महफूज

चल घटा जो हुआ इश्क़ में, शायद अच्छा ही हुआ। कम से कम नादान दिल, तीर ए नजर से तो बचा।। »

बेवजह

मुहब्बत में मुकाम तो मिलता है मुकद्दर वालों को। हम बेवजह ही आज़माए अपनी सोए मुकद्दर को।। »

जैसी करनी वैसी भरनी

एक बहू अपनी सास को हमेशा भला बुरा कहा करती थी। सास चुपचाप रह जाती थी। क्योंकि उसका पति नहीं था। एक बेटा भी था तो वह बीवी के गुलाम बन कर ऐश की ज़िन्दगी गुजार रहा था। समय के पहिया यों ही घूमता गया। सास बेचारी पानी पानी कह कर मर गयी। मगर बहू ने पानी तक नहीं दिया। बहू व बेटे दोनों मिल कर खूब दानपुन किया। ताकि माँ की आत्मा को शांति मिल सके। और उसे किसी भी काम में बरकत हो। मगर ऐसा नहीं हुआ। दिनोदिन कर्ज... »

हंसते हंसते

कोई उसे जान से भी ज्यादा चाहा था किसी बेवफा को। उसने पल में ही तोड़ दिए सपने हंसते हंसते किसी को।। »

मुझे यह गम नहीं

ए मेरे दोस्त मुझे यह गम नहीं कि तुम मेरे न हो सके, गम तो इस बात की है कि तुम मुझे कभी समझ न सके। »

कहाँ गया वो ? (रहस्य रोमांच) भाग — २

आपने भाग १ में पढ़ा – (राम उसे देख कर बुरी तरह से डर गया। वह बांध के नीचे से रास्ते के तरफ आ रहा है। आखिर वह राम से क्या चाहता है। जबकि राम अपनी कंठ को अपनी ही थूक से बार बार भीगो रहा था)अब आगे वह अधेर उम्र की व्यक्ति राम से दस गज की दूरी बना कर बीच रास्ते पर खड़ा हो गया। कुछ देर बाद उसने कहा “मुझे प्रतिदिन इसी समय एक लीटर दूध चाहिए। क्या तुम दोगे” ?राम, जबाब में सिर हिलाया। R... »

कहाँ गया वो ? (रहस्य रोमांच)

छपरा जिला के सांई गाँव में ग्वालों की घनी आवादी थी। वहाँ के लोग गाय भैंस पाल कर ही अपना घर परिवार चलाते थे। उसी गाँव में राम नाम का एक ग्वाला था। वह प्रतिदिन शाम के समय बाजार में दूध बेचने जाया करता था। कभी कभार घर लौटने में देर हो जाया करता था। उस रात भी उसे देर हो चुकी थी। रात के यही कोई दस या सवा दस का वक्त था। वह अपनी साईकिल से मस्ती में आ रहा था। रास्ता सुनसान की आगोश में सो चुकी थी। रास्ते म... »

थी जुस्तजू दिल को मगर…

रास्ते के पत्थर समझ के, ठोकर मार कर चले गए वो। हम किनारे पे खड़े रहे, किसी के हो कर गुजर गए वो।। »

हाय रे किस्मत

खुद को जला के हम, अपनी प्यास कहाँ बुझा पाए। समंदर भी मुझे देख कर , अपनी धारा बदलती जाए ।। »

सच्चे मन से

रावण जलाना ही है तो मन में छिपे रावण को जलाओ। गर तुम से न जले तो सच्चे मन से श्री राम को बुलाओ।। »

अधर्म पे धर्म की विजय

जब जब धर्म अधर्म के चंगुल में फंसा, तब तब इस धरती पे पुरुषोत्तम का जन्म हुआ। अत्याचार से धरती फटी अधर्म से नील गगन, तभी तो दिव्य पुरुष के हाथों अधर्मी का अंत हुआ। बुराई पे अच्छाई की जीत तो एक दिन होना हो था, “ढोल शूद्र पशु नारी” यही अधर्म के कारण पापी का आज अंत हुआ। »

सुरक्षा कवच

रावण जलाया तो क्या जलाया, दिल के रावण जलाओ तो जाने । तुम्हारी ढकोसला षडयंत्र को हम, अपनी सुरक्षा कवच क्यों माने।। »

नीली गहराई

चलो इश्क़ की दरिया में कूद कर देखते है। सुनता हूँ नीली गहराई का कोई अंत नहीं है।। »

दो रास्ते

एक रास्ता मय़खाने की ओर दूसरा रास्ता शबाब की ओर। उतावला दिल किधर जाए इधर जाए या उधर जाए।। »

इश्क़ के मारा दो बेचारा

हम तो गिर कर भी संभल नहीं पाए क्या करें चाहत की डोर ही कुछ ऐसी थी। वो कहते रहे चिंगारी से कभी न खेलना हम जान कर भी अनजान बने रहे क्या करे हमारी तकदीर ही कुछ ऐसी थी जब मिला मैं इश्क़ के जौहरी से — उसने कहा अश्क़ न बहा ए मुकद्दर के फकीर आशिक़ जो हाल तेरा है वही हाल कभी मेरी भी थी। »

लोग कहने है मुहब्बत किसी १ से होता है। क्या इस युग में भी किसी १ से ही होता है।। »

……. क्या तुमने कभी

कौन कहता है कागज के फूलो से , कभी खुशबू आ नहीं सकती है। मैं कहता हूँ – क्या तुमने कभी, कागज के फूलो पे सच्चे मन से- महबूबा के नाम लिख कर देखा है।। »

बरसात

जब हुई आँखों से, अश्कों की बरसात। तब याद है मुझे,थी वो बरसात की रात।। »

बेवफा से वफ़ा

दिल ले के वो नादान, दग़ाबाज़ी करते चले गए। रेत में हम उनके लिए, महल बनाते चले गए।। हमें क्या पता था, खूबसूरत समंदर की बेवफ़ाई। हम तो समंदर की सुरत पे, एतवार करते चले गए।। जो होना था सो तो हो गया, क्या करे “अमित ” । ए आँखें भी बिन सावन के ही, बरसते चले गए।। »

सड़कछाप आशिक़

दिल फेंक आशिक़, सड़क पे अक्सर मिल ही जाते है। गर बोलो दो मीठी बातें तो, जल्द ही मजनू बन जाते है।। »

क्या से क्या हो गया

चारो दिशाओं में आज मतलबी इंसान बसते है। तभी तो आज हमारे मन में नफरत ही पलते है।। »

अर्शे बाद…

मैं दोस्तों के अंजुमन में, अर्शे बाद आया हूँ। खुद को थाम लीजिए मैं फिर वही दिल लाया हूँ।। »

जुल्म से कांपी इंसानियत

जब जब ज़ुल्म की जलजले इस ज़मीन पे फन फैलाया। तब तब इन्सान की इंसानियत खून की आँसू ही रोया।। »

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