Praduman Amit, Author at Saavan's Posts

जेष्ठ की तपती धूप

जेष्ठ की तपती धूप में, एक माँ अपने छह महीने के बेटे को अपनी पीठ में बांध कर मजदूरी कर रही थी। बच्चा भूख व गर्मी से तड़प रहा था। वह जोर जोर से चिल्ला रहा था। वहाँ के मुंशी जी का कहना था कि,कोई मजदूर मेरे मौजूदगी में अगर बैठा पाया गया तो ,उसकी उस दिन की हाजरी काट दिया जाएगा। यही सोच कर माँ अपने बच्चे को दूध पिलाने में असमर्थ थी। वह बच्चा रो रो कर व्याकुल था। बच्चे की तड़प और पसीने से भीगी दुखियारी म... »

कफ़न

ए मेहज़बी , दिलनशी , मेहक़शी , ए गुलबदन । नजरे चार हो उससे पहले ले आए अपनी कफ़न ।। »

फ़िदा

उनका महकना भी एक अजीब अदा है। इसलिए तो हर शायर उन पर फ़िदा है।। »

ज़हरीली नागन

ए ग़ालिब जरा जरा देख तो सही, कहीं वो वही बे -वफा तो नहीं। जो कभी दिल के बदले दर्द दिया था, कहीं वो वही ज़हरीली नागन तो नहीं।। »

जवानी

माना अपनी जवानी पे जोड़ नहीं। फिर भी हम किसी से कम नहीं।। »

क्यों

सावन मे सखी मन 💕 क्यों बहके । सारे पपीहा पेड़ पर क्यों चहके।। काली घटा प्रेम रुत क्यों ले आई। उसके आने से मन 💕 क्यों धड़के ।। सावन के 💧 बूंद गालो को क्यों चूमे। इस मौसम में अंग अंग क्यों फड़के।। »

बरखा रानी

तन मन 💕 में आग 🔥लगाए ए जलता पानी। जरा थम थम के बरस ए बरखा रानी । । »

बयार

पूरब से बही सावन के बयार। झूम के आयी बरखा बहार।। »

सावन के बूंद

सावन के एक एक बूंद गिरा जो मेरे होंठों पे। कैसे बयां करू अपनी उल्फतें दासतां सुर्ख होंठों से।। »

दिलवाले

मिट जाओगे , पाक मुहब्बत को खाक में मिलाने वाले। आसमान के, कदमों पे झुका देंगे हम है वो दिलवाले।। »

ज़ुल्मी जमाना

मुहब्बत (💘) के गुनहगार जरा होश में आ जाओ। कब्र खोदे हो किस के लिए जरा यह तो बताओ।। »

बे-रहम

शीशे से बेरहम पत्थर को तोड़ता रहा । मेरे रकीब मुझ पर तोहमत लगाता रहा।। »

सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार (भाग -२)

(आपने अगले पेज में पढा कि, अमित अपनी उलफत की दास्तां अपने दोस्त सुरेश को सुनाया। क्योंकि, अनिता के प्यार में वह पागल हो गया था। सुरेश अमित को किस तरह सही रास्ते पर ला कर खड़ा किया। आगे पढिए—-) ——————————– सुरेश -“वह तुम्हारा अमानत नहीं है। अपने को संभालो अमित। इस संसार में लड़कियां उसे ही चाहती है जिसके पास दौलत और गुण ह... »

नकाब

एक नकाब है चेहरे का ,दूसरा नकाब है हिजाब का। हमने कयी गुलाब देखे है पर ,देखा न चेहरा जनाब का।। »

सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार(भाग-१)

अनिता नाम था। देखने में साँवली सलोनी। उसकी आँखें किसी गहड़ी झील से कम नहीं था। उसकी मुस्कान व अदा का क्या नाम दें, मेरे पास शब्द ही नहीं है। कुदरत ने केवल उससे गोरा रंग ही चुराया था। चंचल स्वभाव के कारण ही अमित उसे कब कहाँ क्यों और कैसे दिल दे दिया पता तक नहीं चला। वह हमेशा अमित के संग हंसी मजाक, लड़ाई झगडा कर लिया करती थी। कभी कभी एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। दो तीन दिन बाद फिर एक दूसर... »

कोरोना चालीसा

कोरोना कोरोना कहते हो कोरोना से क्यों डरते हो। शाम सवेरे जब देखो कोरोना चालीसा भजते हो।। कोरोना के डर से तुम कोरोना की उपासना करते हो। सोते जागते उठते बैठते कोरोना चालीसा भजते हो।। कहे कवि डट के मुकाबला करना तुम कहाँ सिखते हो। भूखा प्यासा चौक चौराहे पे कोरोना चालीसा भजते हो।। »

कैसी खता?

ए सनम कहाँ खो गये हो । बोलो न ए सनम कहाँ खो गये हो।। किस खता की सजा हमने पायी। एक मर्तबा बता तो दे ए हरजाई।। »

……किसी से कम है?

मेरे देश की मिट्टी किसी सोने से कम नहीं। खेतो में लगी फसल किसी हीरे मोती से कम नहीं।। यही धरती की गोद में खेले पले हुए हम जवां। हिमालय से निकली गंगा किसी अमृत धारा से कम नहीं।। हमारे देश पे बुरी नजर रखने वाले जरा सुन तो ले। शहीदों के लहू से रंगी यह धरती किसी चंदन से कम नहीं।। »

दो गज की दूरी

आओ साथी मास्क लगाए। अपनो से दो गज की दूरी बनाये।। स्वस्थ खुशहाल तो देश खुशहाल। यही मंत्र सभी को काम आए।। हर मर्ज के दवा है हमारे पास। बस थोड़ा सावधानी बरती जाए।। कोरोना से हम नहीं हम से है कोरोना। फिर क्यों डर कर हम जीवन बिताए।। माना कि हमने नियमों को उलंघन किया। बस, बस अब भी नियमों के पालन किया जाए।। »

नागन

ए नागन ज़रा देखें तो तुझ में कितना है जहर। तूने अनगिनत आशिकों के दिल ढाया है कहर।। »

तारीफ़

फलक के सितारे भी तारीफ़ करते हैं तेरी अदा को। जरा मैं भी तो देखूं खुदा ने किस कदर बनाया है आपको।। »

नये जमाने की नयी बेटियाँ

कामयाबी के डगर पे चल पड़ी है, नये जमाने की नयी बेटियाँ। बेटी से नफरत करने वाले जालीम समाज, देख आसमां में छा गयी आज की नयी बेटियाँ।। वो जमाना गया जब हम जुल्म के शिकार थे, अब ईंट के जवाब पत्थर से दे सकती है बेटियाँ। हम से है जमाना जमाने से हम नहीं, यही एलान करती है आज की नयी बेटियाँ।। बेटी को जन्म से पहले ही माड़ने वाले, जरा सोच तेरी माँ भी किसी की रही होगी बेटियाँ । क्या होता जब माड़ देती तुझे वह अ... »

ए माँ

मत माड़ ए माँ मुझे, तू अपनी कोख में। बेटा बन कर दिखाउंगी, आ जाने दे जग में।। »

थप्पड़

उनका एक थप्पड़ इश्क़ में घी का काम कर गया। बुझे चिंगारी को बेशर्म शोला और शबनम बना दिया।। »

अब पछताए होत क्या (कोरोना)

कोरोना से न करना यारी। यह है जान लेवा बिमारी।। कितने को डसा ए काला नाग। आज पर गया हम सब पे भारी।। क्यों सो चूके थे हम और तुम। चुपके से कोरोना का वार था करारी।। अच्छा होता काश!! हम संभल जाते। शायद ही देखने को मिलता ए महामारी।। »

मय

मै अपनी जवानी गुजार दी मय के मयख़ाने में। अब तो बस खाली पैमाना बच गया मेरे जिंदगानी में।। »

सावन व महबूब

एक तरफ सावन के रुसवाई तो दूसरे तरफ महबूब की जुदाई। ए मेरे खुदा तू ही बता कैसी है सावन व महबूब की खुदाई।। »

बेताब

एक तरफ सावन के बरसात तो दूसरे तरफ अश्कों के शैलाब। जब जब बैरी कँगना खनके तब तब दिल हो जाए बेताब।। »

महफूज

दिल के वीराने में फिर, उल्फते गीत गा रहा है कोई। महफूज धड़कनो में मुद्दत बाद, एहसास दे रहा कोई।। »

मय

ए आँखें, ए होंठ किसी मय से कम नहीं। वो मय किस काम का जिस मय में आप नहीं।। »

कयानात

काली स्याह जुल्फे तेरी, काली घटा पे कयामत ढाती है। गर बिखरा दे अपनी जुल्फ, मेरी कयानात में रौशनी आ जाती है।। »

गिरफ्त

कौन कहता है तेरी अदा के कायल हम नहीं है। रात दिन तेरी गेसुओं मे उलझा रहता हूँ ए क्या कम है।। »

आँखें

यों न देख इस अदा से कहीं मर हम न जाए। ए आँखें देखे है कई मर्तबा दीवानो को मरते हुए।। »

कोई एक दीवाना

मुद्दत बाद ए दोस्त भेजा उसने मेरे नाम इश्क़ ए पैगाम। गुजर गया वो जमाना कभी याद करते थे उनको सुबह शाम।। न मै बेवफा थी न वो बेवफा था बेवफा था ए ज़ुल्मी जमाना।। सोचा था मुकद्दर साथ देगा ए दोस्त निकला वह भी बेगाना।। कुदरत के तमाशा तो देखिए मै कहाँ आज वो कहाँ सूखे पत्तों पे मेंहदी के रंग चढाने चले है फिर कोई एक दीवाना।। »

आवारा सावन

सावन के एक एक बूंद जो गिरा मेरे होंठो पे। कैसे बयां करू अपनी दास्तां इन सुर्ख होंठो से।। उन्हें क्या पता कब चढी सोलहवां सावन मुझ पे। आ कर एक मर्तबा देख तो ले क्या गुजरा है इस दिल पे।। बहकने लगे है मेरे कदम यही बेईमान फीजाओ में। उलझन में फंस गए हम इसी बरस के सावन मे।। »

जुस्तजू

आज की रात कयामत की रात है। गर तुम हो मेरे साथ तो जन्नत की बात है।। थी जुस्तजू तुम्हें पाने को मगर। क्या करू सब की अपनी मुकद्दर है।। डर है मुझे कहीं ए चिराग बुझ न जाए। इसलिए हवा के रुख बदलने का इरादा है।। »

दीवानगी

चलो हम भी बनाए एक ताजमहल दिल के आगरा में। शाहजहाँ जैसे बनाउंगा एक महल दीवानो के कब्र में ।। »

ए नारी

राह में रोडे़ है ए नारी तुझे चलना ही होगा। दुःख सहने वाली ए देवी तुझे जीना ही होगा।। माना कि, पुरूष के हाथों तू हमेशा छलती आई। फिर भी हर हाल में तुझे मुकाबला करना ही होगा।। कोई तुझे माँ कहा , बेटी कहा, बहन कहा,देवी कहा। माँ, बेटी, बहन, देवी होता है क्या , आज नहीं तो कल उसे समझना ही होगा।। »

बे-वफा

उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए। जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।। वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था । हम तो बस उनके लिए छोटा सा महल बनाने में लग गए।। बने थे कभी वो मेरे दोस्त, मेरे हमदम, मेरे इब्तिदा । उनके मुस्कान को हम इश्क़ के सिलसिला समझने लग गए।। »

दो शेर

नजर मिला के मेरे हमराज़ वहाँ छोड़ा । देखने आते हैं दो गुलाब जहाँ तालकटोरा।। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, इश्क़ -ए-राहत के दवा लाया जब इन्दौर से। उतरने लगा तब इश्क़ -ए- जुनून मेरे सिर से।। »

एक न एक दिन

रात के अंधेरे में मुंह छुपा कर चलने वाले . एक न एक दिन तुम्हें उजाले में आना ही पड़ेगा। अपने किए करनी के हिसाब ए चतुर इन्सान, दुनिया के सामने तुझे रखना ही पड़ेगा ।। »

रोग

जब मै अपना नब्ज दिखाया “मीर ” को। उसने कहा इश्क़ -ए -बुखार है आपको।। »

गीत

हो….. सुन ऽऽ ए चँदनिया, सुन ऽऽ ए दिलजनिया जियरा मे सटायी के, लहराई ल ऽऽ चुनरिया हो…… सुन ऽऽ ए चँदनिया, सुनऽऽ ए दिलजनिया …………………………………………………………………………….. गर न तोहके नियरा हम अवऽती प्यार हम तोहसे कयीसे कऽरती गर ... »

बसंत ऋतु

बसंत ऋतु में जब बहा बसंती ब्यार। गिरने लगी आसमान से सावन के फुहार।। कहीं दूरऽ से जब कोयलिया मधुर गीत सुनाए । दिल के बगिया में सैंकड़ों कलियां खिल जाए।। ए रिमझिम के नजारा लगता है कितना न्यारा। दिल में एहसास जगाए मीठा मीठा प्यारा प्यारा।। पतझर जीवन में साल भर पे आया बसंत बहार। यही मौसम में होता है किसी से किसी को प्यार।। कहे कवि — काश ऽऽ यह बसंत ऋतु न आता। सोंचो – सुखी डाली पे मेंहदी के ... »

कड़ाई से लड़ाई

आओ साथी करे हम कोरोना पे कड़ाई। यही से होगी हमारी भारत की लड़ाई ।। वार पे वार हम सहते गए,अब न सहेंगे । चलो चलें हम करे पीड़ितों की भलाई।। यही बनता है हमारा अपना परम धरम । इसी में छिपी है मानवता की सच्चाई ।। »

,,,,,, क्या कम है ?

,,,,,,क्या कम है (कविता) Independence day कौन कहता है हमारे वतन में, प्रेम की गंगा नहीं बहती है। हिमालय से गंगा, यमुना, और सरस्वती के मिलन ए क्या कम है? यही वो देश है जो कभी, सैकड़ों सपूतो ने लिया था जन्म। देश पर हो गये थे सभी कुर्बान,उनकी कुर्बानी की दास्तां अन्य दास्तां से कम है? हमारा आन तिरंगा बान तिरंगा शान तिरंगा , तीन रंगो में लिपटी हमारी धरती माता, यही रंग भारत को भाता ,कितना मनोहर कितना प... »

वफा से बे – वफा

माथे पे आज पसीना के बूंद आया है क्यों। जो कल तक थे हमारे आज अजनबी है क्यों।। दामन – ए – यार का जब साथ पकड़ा था मैने। हल्की मुस्कान से हम पर वार किए थे क्यों।। जन्म जन्म का वादा था साथ निभाने का । आज वादे को कबर में दफना के मुस्करा रहे है क्यों।। गैर के हाथों में है आज उनके नाजुक से हाथ। वफा के दिलासा दिलाने वाली तू बे-वफा बनी क्यों।। सोचा था सारी खुशियां तुम्हारे दामन में डाल दूँगा। ए ... »

शायद

आँखों में अश्क लिए शायद,मेरे कब्र पे आ गया है कोई। मैं नहीं था बे-वफा शायद, यही गीत गुनगुना रहा है कोई।। »

ए साथी

रुह अधूरे जिस्म अधूरे एक दूजे के लिए। तेरा साथ चाहिए ए साथी जन्म जन्म के लिए।। »

एहे बरस के सावन मे (भोजपुरी गीत)

सावन में सावन में, एहे बरस के सावन मे आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं एहे बरस के सावन मे सावन में सावन में , एहे…………………………………….. आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं………………………….. +++++++++++++-+++++++±+++±+++ साजन बऽनऽब हम सजनी तोहार कोरस — सजनी तोहार गोलकी सजनी तोहार झूल... »

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