जज़्बातो के तूफान

मेरे इन आँखों में प्यार की एक बूंद नहीं
कभी इन में प्रेम का समन्दर उमङा था
खुद पर पछतावा करें
या खामोशी से भूल स्वीकार करें
इसी जद्दोजहद में,
मन में उमङते जज़्बातो के तूफा में
चीखती खामोशी पसरा था

Comments

4 responses to “जज़्बातो के तूफान”

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब, बहुत लाजवाब

  2. Geeta kumari

    मार्मिक अभिव्यक्ति

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