बहुत मनाता है दिल मुझे ,
उसके लिए,
मगर मैं कैसे विचलित होती,
ठोकरों से उभरना सीख जो लिया ।
बहुत मनाता है दिल मुझे
Comments
11 responses to “बहुत मनाता है दिल मुझे”
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ठोकरें खाने के बाद ही हर कोई सही से जीवन बिताता है।
बहुत अच्छी कविता।-

सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद दीप सर
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Wah!!!
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Amazing lines!😍❤😊
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Thanks
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वाह
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धन्यवाद सर
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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बहुत ही बढ़िया
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बहुत बहुत धन्यवाद
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