जज्बा जो जगा है ज़हन में

जज्बा जो जगा है ज़हन में,
कुछ पाने का,
उसे कैंसर से कम ना समझना,
उबल रहा है हौसला,
फौलाद-सा,
कभी गलती से पस्त ना समझना।

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Responses

  1. नए नए प्रतीक एवं उपमानों का प्रयोग करना, श्रेष्ठ काव्य सर्जन की पहचान होती है
    आपने कैंसर उपमान का बहुत ही सटीक प्रयोग किया है ऐसा जज्बा जो कैंसर की तरह कभी खत्म नहीं होता है बहुत ही तारीफ के काबिल रचना

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