बादलों से चाँद
जैसे निकल आया हो
आके अपनी छटा से
सारी गम की परछाई को
मुझसे छिपा आया हो
हाँ, कुछ इस तरह
तेरा ख़याल आया हो।
कुछ इस तरह
Comments
4 responses to “कुछ इस तरह”
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मन मे आये ख्याल की चाँद से उपमा की गई है। सुन्दर पंक्तियाँ
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सादर धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव
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बहुत बहुत धन्यवाद
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