दिल वालों की दिल्ली

दिल वालों की दिल्ली देखो ,
हो गई है बीमार
कहीं किसी का साथी छूटा,
कहीं किसी का प्पार
दिल्ली का तो अब ये नसीब हो गया
हो गया वहीं दूर, जो करीब हो गया ।।

*****✍️गीता*****

Comments

13 responses to “दिल वालों की दिल्ली”

  1. बहुत खूब, लाजवाब, गीता जी

    1. Thank you very much kamla ji.Grateful to you

  2. बहुत सुंदर भावाभव्यक्ति,
    कहीं किसी का साथी छूटा
    में सुन्दर अनुप्रासिक अलंकरण कर वास्तविकता से रूबरू कराने का सुंदर प्रयास

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏 सादर आभार ।

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद जोशी जी🙏

  3. Seema Chaudhary

    अरे वाह, दिल्ली और दिल्ली वालों की व्यथा का यथार्थ चित्रण ।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सीमा

  4. Suman Kumari

    सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. धन्यवाद जी

    2. बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी

    1. सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

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