दरख्तों से गिरते पत्ते
उठा करके रोये
जब भी खुल गई आँखें
फिर हम ना सोये
जब भी आई मेरे सामने
तुम्हारी सहेली
लिपट करके उससे तेरी
यादों में रोये…
दरख्तों से गिरते पत्ते
Comments
3 responses to “दरख्तों से गिरते पत्ते”
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अतिसुंदर भाव
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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सुन्दर अभिव्यक्ति, मन के गम का सुंदर स्वरूप में चित्रण
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