भरोसा ख़ुद पर..

ना रो बंदे,
ज़ार-ज़ार
ख़ुद पे कुछ
भरोसा तो रख
रोए तेरे बाद
ये ज़माना बार-बार
तुझे याद करके
ऐसा कुछ काम तो कर

*****✍️गीता

Comments

6 responses to “भरोसा ख़ुद पर..”

  1. वाह क्या खूबसूरत भाव हैं, बहुत अच्छा,

    1. Geeta kumari

      कविता की सुंदर सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी 🙏

  2. कवि गीता जी के सुन्दर भावों और सुन्दर सीख को अभिव्यक्त करती बेहतरीन कविता है यह। गागर में सागर है। शब्द युग्मों का बेहतरीन प्रयोग है। संप्रेषण प्रबल है। वाह

  3. Geeta kumari

    आपकी इस बहुमूल्य समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
    आपकी ये कीमती समीक्षाएं बहुत ही उत्साह वर्धन करती हैं सर 🙏

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏 बहुत बहुत आभार

Leave a Reply

New Report

Close