रह जाते हैं ख्वाब अधूरे
झूठे-मूठे वादों से
जब से तूने ये दिल तोड़ दिया
डर लगता है सबकी बातों से
चाँद ताक कर कटती हैं
जब से मेरी रातें
*राम कसम’* तबसे मुझको
डर लगता है रातों से…
***राम कसम***
Comments
6 responses to “***राम कसम***”
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वाह👌✍
❤❤❤ -
वाह, बहुत ख़ूब
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Very nice
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बहुत खूब, बहुत ही उम्दा भाव, सरल व सहज भाषा व शिल्प
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अतिसुंदर
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सुन्दर
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