हमें थोड़ा-सा वक्त और दो
हम अच्छे बन जाएगे
जैसा तुम कहोगी वैसा ही कर जाएगे
जितना करीब आओगी मेरे तुम
उतना ही सबसे दूर चले जाएगे
वादा है मेरा प्रज्ञा’ तुमसे
एक दिन हम तुम्हारे हो जाएगे
ना देखेगे हम किसी और की तरफ
रहेंगी निगाहें बस तेरी तरफ
होंगे हम वफादार प्यार में इतना
देखेंगे ना हम किसी और की तरफ
दोस्ती होगी पक्की हमारी
मानेंगे सारी बातें तुम्हारी
शायद प्यार भी हो जाएगा तुमसे !
तुम ही रहोगी दोस्त हमारी..
पर सारी बातें सिर्फ बातें ही रह गईं
तोड़ दिया विश्वास मैं अकेली रह गई
तुम जिस तरह तोड़ी मेरी आस
अब दोबारा ना होगा किसी और पर विश्वास…
थोड़ा-सा वक्त और…
Comments
5 responses to “थोड़ा-सा वक्त और…”
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तुमने जिस तरह’ पढ़ें
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बहुत ही खूबसूरती से भावों की अभिव्यक्ति की है कवि प्रज्ञा जी ने ।
सुन्दर प्रस्तुतिकरण-

Thanks
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सुंदर
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अतिसुंदर
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