18-हँसना मेरी मजबूरी
( मुक्त छंद 16 मात्रा )
फूलों में आज सुगंध नहीं
खुशियों का कोई भाव नहीं
न चेहरे पर मुस्कान कहीं
पर हँसना मेरी मजबूरी..।
विनय रूप कायरता बनती
आंखों से जलधारा बहती
हुई ध्वस्त हमारी आशा
पर हँसना मेरी मजबूरी..।
अहम भाव का ताज जहाँ हो
इंतिहान पल पल होता हो
उम्मीद वफा के टूट गई
पर हंसना मेरी मजबूरी…।
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