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  1. “सुबह रहे तेरा नमन, कर्म हो तेरा सिमरन” वाह, प्रातः काल में प्रभु पर इतनी सुन्दर कविता, सुबह प्रभु का नमन हो और कर्म ही प्रभु का सिमरन हो ।अति सुंदर शिल्प और शब्दावली का प्रयोग है । अति सुन्दर रचना

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