गुलाबी सर्दियां

गुलाबी सर्द रातों में
तुम्हारी याद आती है
तैरते हैं जब सितारे
आसमान की गोद में,
बिछा लेता है चाँद
जब हिमालय पे बिस्तर
और बरस पड़ती हैं
ओस की बूंदें,
तो मन मचलकर करता है तुम्हें याद
हवा में बहता हुआ संदेश
जब तुम्हारे पास पहुंचता है
तो तुम उनींदी आँखों से
वो संदेश पढ़ते हो पर
कोई जवाब नहीं देते!
तो यही गुलाबी सर्दियां
काटने को दौड़ती हैं और
मुझे विरहाग्नि में जलाकर मार देती हैं…

Comments

8 responses to “गुलाबी सर्दियां”

  1. Geeta kumari

    प्रियतम की याद और उसकी बेरूख़ी को दर्शाती हुई बहुत सुंदर अभिव्यक्ति । ह्रदय स्पर्शी पंक्तियां

  2. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    खूबसूरत अभिव्यक्ति

  3. बहुत ही सुन्दर

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