कृषि हमारे वतन की रीढ़
कृषकों के श्रम से कौम का पेट भरता है ।
पर इनकी उपेक्षाओ से
क्यूँ ना हमारे प्रतिनिधियो का दिल दहलता है ।
सङको पर इनका विरोध प्रदर्शन
अन्नदाताओ की समस्याओं का संकेत देता है ।
इनकी दयनीय स्थिति
हमारी लापरवाह नीतियों का आभास देता है ।
विश्वास जगाने की जगह
बलप्रयोग कर, नजरअंदाज तानाशाही का संकेत देता है ।
कृषक
Comments
3 responses to “कृषक”
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कृषकों के लिए सुंदर भाव
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सही कहा आजकल जो हो रहा है बड़ा दुःखद है
कोई किसान की समस्या नहीं सुन रहा बल्कि उन्ही को परेशान कर रहा है
लानत है ऐसे दोगले सिस्टम और सरकार पर
बेहद गम्भीर रचना -
अतिसुंदर भाव
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