जरूरी है नहीं हर फूल की
खुशबू मेरी ही हो,
मुझे मेरी जरूरत का मिले
बाकी सभी का हो।
हमेशा जिद कहाँ तक पूर्ण हो
नादान मन की इस,
हमेशा की जलन इसमें
कभी चन्दन भी लेना घिस।
मुँहासे इस उमर में
आ रहे हैं गाल पर मेरे,
झुर्रियां जिस उमर में
उम्र का परिचय बताती हैं।
निगाहें ढूंढती चोरी-छिपे
धब्बों को दूजे के
कमियाँ खूब हैं खुद में
मगर रहते हैं भूले से।
कभी चन्दन भी लेना घिस
Comments
2 responses to “कभी चन्दन भी लेना घिस”
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अतिसुंदर भाव
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वाह क्या बात कही है आपने।
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