पत्थर में डाल प्राण
सेतु हम बनायेंगे
माझी हैं मजधार के
पार ही हो जायेगे
ना रुकेंगे हम कभी
आगे बढ़ते ही जायेगे
सूर्य की आँखों से
आँख हम मिलायेगे
और चल पड़ेगे हम
पवन से भी तेज फिर
बालू के ढेर पर
घरौंदा हम बनायेंगे
आसमानी पंख से
भर लेंगे उड़ान हम
अपने हौसलों से
आगे बढ़ते ही जायेंगे
हम माझी हैं मजधार के
Comments
6 responses to “हम माझी हैं मजधार के”
-
बहुत खूब, सुन्दर और प्रेरक रचना
-

धन्यवाद
-
-
अतिसुंदर भाव
-

धन्यवाद आपका
-
-

This comment is currently unavailable
-

धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.