8 Comments

  1. “मोती बन बूंद-बूंद बिखर गए,”
    वाह, गीता जी आनुप्रसिक छटा बिखेरती हुई बेहद खूबसूरत कविता
    बर्फ़ गिरने का मोहक चित्रण

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