राम आयेंगे तेरे द्वार

राम आयेंगे तेरे द्वार
तु मन से हटा ले विकार
तेरा बेडा पार लगायेंगे राम
तु मन से हटा ले विकार

राम आयेंगे तेरे द्वार
तु मन से हटा ले विकार

गणिका को प्रभु उबारा
अहल्या को प्रभु तारा
तेरा भी शरनागत करेंगे स्वीकार
तु मन से हटा ले विकार

राम आयेंगे तेरे द्वार
तु मन से हटा ले विकार

पतितों को पावन करते है राम
भोगी को बैरागी बनाते है राम
सबको अपना आसरा देकर नाथ
सबका भावसागर पार लगाते है राम

राम आयेंगे तेरे द्वार
तु मन से हटा ले विकार
कवि विकास कुमा

Comments

4 responses to “राम आयेंगे तेरे द्वार”

  1. Geeta kumari

    बहुत शानदार रचना । जय श्री राम

  2. जय श्री राम

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