3 Comments

  1. “हालातों से जूझ-जूझकर हुए तजुर्बे जीवन के,
    लगी हुई है खूब निभाने फर्ज-कर्ज इस जीवन के।”
    _____ जब कम उम्र में ही ज़िम्मेदारी का बोझ पड़ता है तो बचपन में ही जीवन के तजुर्बे मिल जाते हैं, इस कथन को कहती हुई कवि सतीश जी की , कठिन जीवन की सच्चाइयों से समाज को रूबरू करवाती हुई , रुचिर लय बद्धता लिए हुए बहुत उत्कृष्ट रचना है

Leave a Reply