अगर निराशा है कहीं, दूर करो तत्काल,
मन में अपने जोश को, सदा रखो संभाल।
सदा रखो संभाल, जोश में जोश न खोना,
आप हमेशा आग नहीं शीतलता बोना।
कहे लेखनी नहीं, निराशा में रहना तुम,
हिम्मत रखना दूर रहेंगी सारी उलझन।
——- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय
प्रस्तुति- कुंडलिया छन्द
निराशा दूर करो (कुंडलिया छन्द)
Comments
4 responses to “निराशा दूर करो (कुंडलिया छन्द)”
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Wow, very nice
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निराशा के भाव से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर छंद बद्व कविता
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अतिसुंदर भाव
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वाह वाह
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