4 Comments

  1. “पढ़ा-लिखा भूखा रहा, और खा रहे खीर,
    कौन लिख रहा इस तरह, यौवन की तकदीर।”
    आजकल के बेरोजगारी भरे माहौल का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई कवि सतीश जी की दोहा छंद में बहुत ही सुंदर और सटीक रचना।
    अति उत्तम प्रस्तुति

Leave a Reply