रोकना मत तुम कदम

लक्ष्य कहता है कि पथ में
लाख बाधाएं रहेंगी,
जब व्यथित हो जाओगे
टूटने वाले ही होगे,
तब समझना आ गए हो
पास मेरे,
सौ निराशा मार्ग घेरें,
रोकना मत तुम कदम को,
एक दिन पाओगे मंजिल
छू रहे अपने कदम को।
वो करो जो आज तक
कोई नहीं कर पाया था,
उसको पाओ आज तक
कोई नहीं पा पाया था।
मत रखो डर-भय किसी से
मार्ग यदि सदमार्ग है,
तुम चुनो उस राह में जो
सत्य का ही मार्ग है।

Comments

4 responses to “रोकना मत तुम कदम”

  1. Geeta kumari

    रोकना मत तुम कदम को,
    एक दिन पाओगे मंजिल…
    मार्ग यदि सदमार्ग है,
    तुम चुनो उस राह में जो
    सत्य का ही मार्ग है।”
    _____मंज़िल की ओर अग्रसर रहने को प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की अनमोल और प्रेरक रचना। लेखनी से निकली लाजवाब कविता

  2. अतिसुंदर रचना

  3. सर्व श्रेष्ठ कवि के सम्मान की बहुत बहुत बधाई सतीश जी

  4. सर्वश्रेष्ठ कवि सम्मान हेतु बहुत बहुत बधाई पाण्डेय जी।

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