सच की राह चले चलो, चाहे हो व्यवधान,
सच को ही सब ओर से, मिलता है सम्मान।
मिलता है सम्मान, उसे जो सच होता है,
झूठ हमेशा झूठ, बना इज्जत खोता है।
कहे लेखनी मान बात सच को अपनाओ,
झूठ दूर कर आज, खूब आनन्द मनाओ।
सच की राह चले चलो
Comments
8 responses to “सच की राह चले चलो”
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वाह बहुत खूब
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बहुत धन्यवाद
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बहुत सुंदर कविता
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बहुत बहुत धन्यवाद
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सच की राह चले चलो, चाहे हो व्यवधान,
सच को ही सब ओर से, मिलता है सम्मान।
__________बहुत सुन्दर पंक्तियां, सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर रचना-
सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत धन्यवाद
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अति, अतिसुंदर भाव
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सादर धन्यवाद
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