खाली क्यों हो सोचते, उल्टी बातें आप।
चाहत को नफरत समझ, क्यों लेते हो पाप,
क्यों लेते हो पाप, मुहब्बत पुण्य काम है,
जो रखता है नेह, वही सच में महान है।
कहे लेखनी आप, रहो खुश पीटो ताली,
चिंता में मत रहो, इस तरह खाली खाली।
———- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय, चम्पावत, उत्तराखंड।
खुश रहो पीटो ताली
Comments
5 responses to “खुश रहो पीटो ताली”
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खाली क्यों हो सोचते, उल्टी बातें आप।
चाहत को नफरत समझ, क्यों लेते हो पाप,
क्यों लेते हो पाप, मुहब्बत पुण्य काम है,
जो रखता है नेह, वही सच में महान है।
_________सम्पूर्ण मानव जाति को स्नेह भाव के सौंदर्य और महानता के बारे में बताती हुई,उत्तम शिल्प और सुंदर भाव लिए बहुत ही सुन्दर छंद बद्ध रचना। -
बहुत खूब
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Nice
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अति सुंदर पंक्तियां
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Very nice
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