4 Comments

  1. ना राधा ना रुक्मणी,
    वो कान्हा की मीरा बनी।
    हरि नाम ही जपती थी,
    ऐसी उसकी भक्ति थी।
    विष का प्याला पी गई,
    जाने कैसे वो जी गई।

    मेरे प्रिय आराध्य कृष्ण और मीराबाई की भक्ति पर अति सुंदर कविता

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