6 Comments

  1. अब फिर से उस तरफ से
    खत आ रहे हैं
    वो हमारी खबर लेने
    घर आ रहे हैं….
    _______ बहुत खूब, कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर और मधुर रचना

  2. अब फिर से उस तरफ से
    खत आ रहें हैं
    वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत
    पुंछवा रहे हैं….

    हमारी फिक्र है या हमारी आरजू
    हम कैसे हैं ? बस वो यह
    जानना चाह रहे हैं…

    बहुत ही रूमानियत भरी रचना

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