रम तू जा माँ के चरणन में

रम तू जा माँ के चरणन में
घर में माता भूखी सोये, फिरे क्यों मन्दिरन में।
छोड़ दिखावा मूरख प्राणी, गर्व न कर निज तन में।
बूढ़ा होगा जब तेरा तन, तब रोयेगा मन में।
अतः आज मौका है भुना ले, बिठा दे फूलन में।
कहे सतीश माँ ही ईश्वर है, यह बैठा ले मन में।

Comments

5 responses to “रम तू जा माँ के चरणन में”

  1. Geeta kumari

    अतः आज मौका है भुना ले, बिठा दे फूलन में।
    कहे सतीश माँ ही ईश्वर है, यह बैठा ले मन में।
    ___________ यह सत्य है कि माँ ही ईश्वर है, कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना, उच्चस्तरीय लेखन

    1. इस प्रेरणादायक समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी।

    1. सादर धन्यवाद शास्त्री जी

  2. बहुत सुन्दर रचना

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