7 Comments

  1. सोने जैसी खरी है,
    पापा की वह परी है।
    मम्मी के नयनों का तारा,
    वह नहीं किसी से डरी है।
    —–अति सुंदर रचना। भाव व शिल्प का अद्भुत समन्वय

    1. उत्साहवर्धक और प्रोत्साहन देती हुई इस सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

Leave a Reply