छोटी सी प्यारी गुड़िया रानी,
पापा की राजकुमारी है ।
पापा की गोदी में खेले,
पापा को सबसे प्यारी है।
अपनी बातों से मन मोह ले,
पापा भी हॅंसकर यूँ बोलें
फूलों जैसी है कोमल सी,
वाणी है मीठी कोयल सी।
उसके आने से घर में,
आई है एक रौनक सी।
दिनभर माँ की गोदी में खेले,
पापा के आते ही यूॅं बोले
पापा आओ गोदी ले लो,
पापा फ़िर सारी थकन हैं भूले।
सोने जैसी खरी है,
पापा की वह परी है।
मम्मी के नयनों का तारा,
वह नहीं किसी से डरी है।
_____✍गीता
पापा की वह परी है
Comments
7 responses to “पापा की वह परी है”
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सचमुच बेटी पापा की परी
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धन्यवाद ऋषि जी
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सोने जैसी खरी है,
पापा की वह परी है।
मम्मी के नयनों का तारा,
वह नहीं किसी से डरी है।
—–अति सुंदर रचना। भाव व शिल्प का अद्भुत समन्वय-
उत्साहवर्धक और प्रोत्साहन देती हुई इस सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी
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बहुत खूब
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धन्यवाद पीयूष जी
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वाह बहुत खूब
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