कई साल गुजर गए पर
आज भी महसूस होता है
जब भी तू इन गलियों से गुजरता है
तेरा आना जाना लगा रहता है
दिल की गलियों में
आंखों की पुतलियों में तू घूमता रहता है
इश्क करना है तो इश्क कर ले
मिटा देना है तो मुझे दिल से मिटा दे
पर यूँ मेरे आस-पास रहकर ऐ बेवफा !
मुझे ऐसी ना सजा दे।।
आंखों की पुतलियों में तू…
Comments
4 responses to “आंखों की पुतलियों में तू…”
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अति सुन्दर रचना
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धन्यवाद
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अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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