2 Comments

  1. चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
    चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
    चाॅंद की रौशनी में,
    तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
    —- वाह बहुत ही सुन्दर रचना। अद्भुत भाव,

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